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शनिवार, 13 मई 2017

माँ के नाम (Mother's day by Purwa Bharadwaj)

आज सब माँ को याद कर रहे हैं. Ritual कहें या फैशन या भावना का सार्वजनिक प्रकटीकरण या भीड़ में शामिल होना कहें या प्रदर्शन - जो हो लेकिन माँ के साथ की तस्वीर खोज रही थी. मैंने महसूस किया कि बहुत कम तस्वीरें हैं. क्यों ?

पहले चलन नहीं था और मेरे बचपन में फोकस बच्चों की फोटो खिंचवाने या 'पेयर' फोटो खिंचवाने पर था. कभी कभी पूरे परिवार की फोटो शादी-ब्याह, होली-दिवाली या ईद-बकरीद, पिकनिक, मेला-ठेला, पूजा, तीर्थाटन, देश-विदेश भ्रमण, (हमारे संदर्भ में) सभा-सेमिनार वगैरह के मौके की मिल जाती थी. साधन संपन्न होना इस शौक और इच्छा से जुड़ा हुआ था और अभी भी है. बाद के दिनों में मैंने याद करके माँ के साथ कुछ तस्वीरें खिंचवाई हैं. शादी के पहले की तस्वीरें इक्का-दुक्का ही हैं. उनमें से एक यह कॉलेज के दिनों की है. साथ तो साथ है और उसकी खुशी छलकनी चाहिए !



इस तस्वीर में माँ की लगभग वही उम्र है जो अभी मेरी है और उस वक्त जो मेरी उम्र थी वह अभी मेरी बेटी की है. सुबह सुबह उसने गले में बाँहें डालकर मुझे प्यार किया. हमलोग तो अपनी माँ को न कभी कह पाए, न चूम पाए. हमारी जैसी परवरिश हुई उसमें गले लगना भी अटपटा लगता था. (वैसे अब ज़रूर घर आते-जाते माँ गले लगाती है. दूरी की चुभन के साथ.) जब मैं खुद अर्थोपार्जन करने लगी तो बीच बीच में उसके लिए अलग से उपहार लिया, लेकिन शायद उसकी इच्छा के हिसाब से नहीं, अपने हिसाब से लिया.

सोचती हूँ कि समय के साथ कितना कुछ बदला है. इंसान के रंग-ढंग से लेकर यादों को सहेजने का तरीका तक.अब लोग बोलने लगे हैं, अपने अहसास को शब्द और प्रतीकों की मदद से पहुँचाने लगे हैं. यह बहुत अच्छा है. कभी कभी उसमें छिछलापन नज़र आता है, कहीं कहीं ढोंग भी मालूम होता है, फिर भी वे शब्द और प्रतीक भाते हैं. गर्माहट, प्यार, विश्वास, खुशी और सच्चाई जितनी भी हो उसे सहेजने की ज़रूरत है. अभी इनकी इतनी कमी होने लगी है कि मन करता है कि छ्टाँक भर, एक पैसा भी कहीं किसी रिश्ते में मिल जाए तो जीवन निकाल लिया जाएगा. हाँ, यह गर्माहट, प्यार, विश्वास, खुशी और सच्चाई की अपेक्षा दूसरों से ही नहीं है, बल्कि खुद अपने से भी है. लेना के साथ देना भी होता है.

आज कितनी तरह तरह की औरतें हकीकत की दुनिया से उठकर आभासी दुनिया में दिख रही हैं ! अच्छा लग रहा है. उनका माँ होना एक तथ्य है, लेकिन वे शानदार औरत होने के कारण देहरी से बाहर निकली हैं. उनकी मेहनत, उनकी प्रतिभा, उनकी हँसी, उनके सपनों को बहुत कम जगह मिली है, यह अहसास है लेकिन उनका खुशी भरा चेहरा इस अकेलेपन के समय में हिम्मत देता है. एक और Women's day मुबारक. उन औरतों को भी मुबारक जो सरे आम 'माँ' की पदवी नहीं पा सकीं और उनको भी मुबारक जिन्होंने यह पदवी सोच-समझकर खुद छोड़ी और उनको भी मुबारक जिन्होंने इसे चुनौती दी.

पूरा ज़माना माँ को एकरूप में ढालने में लगा है. यह उचित नहीं. हर माँ अलग व्यक्तित्व की मालकिन है, इसलिए वह एक खाँचे में फिट नहीं आएगी. वह बच्चों के लिए ही नहीं, बच्चों से भी लड़ सकती है. उससे लड़ना भी नालायकी नहीं. रूठ जाए तो मनाने की हरचंद कोशिश तो हर कोई करता है. फिर भी हर माँ मान ही जाए ज़रूरी नहीं.

अनूठापन हर जगह है तो यहाँ क्यों नहीं ? मुझे यह देखकर हैरानी नहीं हुई कि Anna Marie Jarvis (1864 - 1948, जिनका नाम Mother's Day मनाने की शुरुआत करनेवाली महिला के रूप में होता है) ने न कभी शादी की और न उनके बच्चे थे. 

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ऐना - Anna Marie Jarvis ने अपनी माँ ऐन - Ann Marie Reeves (1832 -1905) के कामों को याद करने के लिए Mother's Day की योजना बनाई थी जिसमें जूलिया - Julia Ward Howe की गूँज थीहालाँकि आगे चलकर Mother's Day का स्वरूप थोड़ा बदला, लेकिन अंततोगत्वा वह औरतों की भिन्न भिन्न भूमिकाओं का उत्सव बना. 

शुरुआत कुछ यों हुई - ऐना ने अपनी माँ ऐन की पहली बरसी पर तय किया था कि Mother's Day मनाया जाए. उनकी माँ ने एक दिन इच्छा जाहिर की थी कभी ऐसा होगा जब कोई माँ की भूमिका को समझते हुए उसे यादगार बनाएगा.  Ann Marie Reeves के शब्द देखिए - 

I hope and pray that someone, sometime, will found a memorial mothers day commemorating her for the matchless service she renders to humanity in every field of life. She is entitled to it.

इसमें  मानवता के प्रति जीवन के हर क्षेत्र में औरतों के अतुलनीय काम की बात की गई है. सिर्फ अपने परिवार के प्रति और घरेलू भूमिका की बात नहीं है. Ann Marie Reeves वाकई बेजोड़ महिला थीं और उनकी सोच का दायरा विस्तृत था. वे लोगों के स्वास्थ्य, शिक्षा और हक़ की बात करते हुए  Mothers’ Day Work Clubs चला रही थीं. औरतों को काम करने का मौक़ा और मुद्दा दिया उन्होंने. उनकी गोलबंदी की. 

ऐन - Ann Marie Reeves की मुहिम में उनको साथ मिला जूलिया - Julia Ward Howe (1819 –1910) का. जूलिया ने जब 1872 में  पहले पहल Mother's Day की बात उठाई थी तो वे एकजुट होने के लिए पूरी दुनिया की औरतों को संबोधित कर रही थी और उनका लक्ष्य था शांति. अमेरिकी गृहयुद्ध के दौर में अमेरिकी औरतों की यह पहल थी. 

Mother's Day Proclamation को देखा जाए तो लगता है कि जूलिया के वे शब्द हू ब हू आज के समय पर लागू होते हैं और वर्तमान राष्ट्रवाद के शोर में सुकून देते हैं -

Image result for Julia Ward Howe, Arise, all women who have hearts, Whether your baptism be that of water or of tears ! Say firmly : We will not have great questions decided by irrelevant agencies. ... From the bosom of the devastated earth a voice goes up with our own. It says: Disarm, disarm! The sword of murder is not the balance of justice. Blood does not wipe out dishonor, nor violence vindicate possession.

In the name of womanhood and of humanity, I earnestly ask that a general congress of women, without limit of nationality, may be appointed and held at some place deemed most convenient, and at the earliest period consistent with its objects, to promote the alliance of the different nationalities, the amicable settlement of international questions, the great and general interests of peace.

कहना न होगा कि Mother's Day एक राजनीतिक मुद्दा था और अभी भी है. यही वजह है कि जब कार्ड और उपहार और फूल बेचनेवाली कंपनियों ने इस मौके का फायदा उठाना शुरू किया तो ऐना दुखी और परेशान हुईं. उन्होंने सक्रिय रूप से इसका विरोध भी किया. वे जब Mother's Day कह रही थीं तो एकवचन पर उनका ख़ास ज़ोर था. वे अपनी माँ के साथ हर माँ जो अनूठी है उसकी बात कर रही थीं. वे फूलों के रंगों के प्रतीक को बिकते हुए देखकर खुश नहीं थीं कि सफ़ेद फूल मृत माँ के लिए और लाल-गुलाबी जीवित माँ के लिए ! सचमुच बाज़ार आज का हो या पिछली सदी का बाँटता ही है !

Mother's Day मनाने की तारीख में विविधता है. अलग अलग देश में अलग अलग तरीके से अलग अलग तारीख पर इसे मनाया जाता है. बहुत जगह सरकारी छुट्टी होती है. मेरे लिए यह लंबी लड़ाई और उसमें भागीदार औरतों का दिन है. हार-जीत से ऊपर यह रंगारंग ज़िंदगी की याद दिलाता है. 

Image result for MARY TOWLES SASSEEN इसमें अमेरिकी स्कूल शिक्षिका Mary Towles Sasseen की ज़िंदगी की सुगंध भी शामिल है. 1887 में उन्होंने अपने स्कूल में Mother's Day मनाना शुरू किया था. उनको मूल "mother of Mother’s Day" कहा जाता है जिनका स्थानीय प्रयास राष्ट्रीय और अब अंतर्राष्ट्रीय उत्सव बन गया है.मेरी ने अपनी माँ के जन्मदिन पर 20 अप्रैल को Mother’s Day मनाया .उसमें अपने विद्यार्थियों की माँ को आमंत्रित किया. उनकी अपनी कविताओं और कहानियों का पाठ बच्चों ने किया था, मेरी ने Mother’s Day Celebration का अभियान छेड़ा और उसके लिए 32 पन्ने का पैम्फलेट निकाला. इस बुनियाद पर ही ऐना आगे बढ़ीं. इस तरह लड़ाई की हरेक ईंट हमारी है. उसपर बनी इमारत और दुनिया भी हमारी है.



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